Powered By Blogger

Saturday, March 31, 2012

FOUR LINES AGAIN


तहरीर जो दी थी तुमने मेरे इस दिल में आने की, रोक देना था मुझे उसी वक़्त तुम्हे कसम दे के जमाने की

ग़र कसम ही खाई थी तुमने नींदें चुराने की, यूँ ही ले जाते रूह हमारी क्या जरूरत थी मेरी धड़कनों पर ऍफ़आईआर कराने की

घुटन की सिलवटों  में खुद को बंद कर लिया कैदियों की तरह, तुम्हे क्या जरूरत थी फिर मेरी जमानत करवाने की

उम्मीद थी एक बार आसमान के नीचे तुमसे मिलने की, भला होगा सच ग़र तुम अर्जी दो मेरी सजाए उम्र क़ैद बढ़वाने की____उमेश सिंह

Wednesday, December 21, 2011

four lines again

क्यूँ मेरी हर सांस को अपना नाम बता गए हो, क्यूँ तुम मुझे इस वक़्त हर वक़्त अपना फ़रियादी बना गए हो

चलती हैं की रहगुजर न रहोगे अब तुम इस वक़्त, पता नहीं शायद इन्हें ये तुम हो जो मेरी मासूम रगों में समां

गए हो 

यूँ तो हर वक़्त फ़ना होती हैं तेरे नाम पर फ़ना करती हैं मेरे वक़्त को बेवक्त,क्यूँ इन्हें हर वक़्त के लिए अपना


बना गए हो


इजाज़त भी नहीं लेती हैं हमसे तुम्हारी इनायत को, कुछ यूँ तुम मुझे और मेरे जिन्दा दिल को जला गए हो


कुछ यूँ तुम तडपा गए हो_______उमेश सिंह

Monday, December 5, 2011

My Lines


तुम में ही सिमट के रह गए हैं हम ये कैसी खुद की रूह को मैंने सज़ा दी है

तेरे अहम की ख़ामोशी न टूटे न रूठे तेरा अहम कभी, इसलिए ख़ामोशी खुद की हमने बढ़ा दी है

अहमियत कुछ ज्यादा है तेरी मेरी नजरों में, तेरे लिए मैंने अपनी नजरों से झुकने की इल्तज़ा की है

न समझे हो मुझे न समझो ग़र मेरे प्यार को,समझना मैं था ही नहीं कभी, खुश रहो तुम तुम्हारे खुश रहने की

हमने हर पल दुआ की है______उमेश सिंह

Tuesday, November 8, 2011

MY LINES :)

ऐ ख़ुदा शिकायत है तुमसे मेरे लिए प्यार क्यूँ बनाया,क्या यही खुदाई है तुम्हारी मेरे दिल को प्यार हुआ पर 


उनके दिल में प्यार नहीं जगाया 

आओ तुम भी जमीं पर प्यार हो तुमको भी,दिल टूटे-तुम्हारा भी-रब रूठे, पूछुंगा क्यूँ दर्द हुआ अब तुमको 


तुम्हारे प्यार ने जब सताया

कितने बेरहम हो तुम और क्या प्यार करते हो हमसे,उनसे मिलाकर उम्मीदें दिल में जगाकर भी उनको हमारे 


लिए नहीं बनाया 

ऐ ख़ुदा शिकायत है तुमसे प्यार क्यूँ बनाया-प्यार क्यूँ बनाया, अब क्या मांगने आऊं तुम्हारे दरपे जितना दिया


है तुमने मैंने सब गंवाया_____उमेश सिंह

Monday, September 26, 2011

समंदर बसा था

जितना तुमको बताना था चुप रहकर बता ले गए तुम



इन आँखों में समंदर बसा था और फिर इक-इक बूँद चुरा ले गए तुम


कितने ख़ूबसूरत थे तुम,हो तुम रहोगे भी पर वो ख़ूबसूरती छिपा ले गए तुम


आओगे कभी-नहीं आओगे,पता नहीं,अपने आने की वो आहट भी क्यूँ दबा ले गए तुम ..........उमेश सिंह

Sunday, August 7, 2011

my lines


क़ाश मुझे भी आईना दिखाना आ जाये, तुम्हारी बेरुखी को तुमसे मिलाना आ जाये 
हम जो हैं जैसे हैं रूह तुम्हारी हो चुकी, फ़रियाद इतनी है मुझे भी नजरें चुराना आ जाये
ख़ुदा रहम करो मेरे यार पर, ग़र वो अपना कहता है तो उसे अपनापन जताना आ जाये
दोस्त कहते हैं मुझे-तुम्हे रिश्ता निभाना नहीं आता शायद सच है खामोश हूँ आकर देखो मेरी झुकी नम आँखों को क्या सच है-सच क्या नहीं शायद तुम्हे भी रिश्ता निभाना आ जाये____उमेश सिंह