Monday, November 9, 2009
राज का राज......... हिन्दी राज
राज ठाकरे जी माफ़ी चाहता हूँ वो इसलिए की मैं हिन्दी बोलना भी जानता हूँ और आपसे ये जानना चाहता हूँ की आप हिन्दुस्तानी पैदा हुए थे मराठी या फ़िर आप को अपनी मात्रभूमि पर संदेह है /
गद्दार लोगों को भारत से निकल कर बड़ी गलती हुई कम से कम वो होते तो भारत में एक ही भाषा होती /
खैर मैं इस बारे में बात करने को नही लिख रहा हूँ मैं ये जानना चाह रहा हूँ या फ़िर कोशिश कर रहा हूँ की भारत देश कितना सहनशील हो गया है माफ़ करिए उत्तर वासियों का देश , दक्षिण का देश ,पश्चिम का हह.....
या फ़िर हम सब भारत वासियों का देश क्या लिखा जाए मुझे सरकार के ढीले रवैये से संदेह होने लगा है /
आज जिस तरह से हिन्दी भाषा पर जूता चला है वो दिन दूर कहाँ रह जाएगा जब बाहर के लोग आकर जूता चला जायेंगे /
theek से याद नही आ रहा है की राज ठकरे जैसे देश द्रोहिओं को कोई सज़ा देने में इतनी ढिलाई क्यों हो रही है जिन लोगों को अज ४ सालके लिए baahar किया गया है उन्हें क्यों नही जीवन भर के लिए किसी भी संवैधानिक प्रक्रिया में भाग लेने se mana कर देना चाहिए /......................................
आगे...
Tuesday, April 7, 2009
अब आगे की कहानी...
दारू पीने वाले लोग अपना तो सत्यानाश करते ही हैं साथ में आस पास के माहोल को भी गन्दा करते हैं / घर से पैसा लेते हैं पढ़के कुछ बनके तब मौज उड़ने की तर्ज़ पे ;;,,, चाहे बाप क्यों न हो क़र्ज़ पे ,,,;;
पर करें भी क्या यहाँ आते ही मॉडल शॉप दिख जाती है इसमे बेचारून की गलती कहाँ दे दें // हर बाए संकल्प लेके उसको तोड़ने की आदती बन चली है युवा पीढी /
पीना जायज है या नहीं है मैं नहीं जानता पर दिखावे के लिए ये सब, पी के गाली देने के लिए ये सब , ये बताने के लिए देखो मैंने शराब पी रखी है ग़लत है।
मैंने एक एक पक्के शराबी से ये पूछा क्या वाकई में तना नशा हो जाता है ..तो उन्होंने कहा ये लोग { जो उनसे कमतर हैं } जितना पी के शोर करते हैं उतना मैं हमेशा पीये रहता हूँ पर मैं नहीं चीखता हूँ या गाली देता हूँ /
संभवता ये विचार अगर किसी पक्के शराबी को मिले तो मेरा सड़क पर चलना दूभर हो जाएगा क्योंकि सारे चरित्र आस पास के ही हैं और मैंने अपनी फोटो भी लगा रखी है
अगर मैं काका hathrasi बन jaoon तो नशा कुछ यूँ हतानूं
** नशा जरूरी है जिन्दगी के लिए ,पर सिर्फ़ शराब हा नहीं है बेखुदी के लिए /
किसी की मस्त नजरों में डूब जाओ , बड़ा हशीन समंदर है खुदखुशी के लिए // **
....... और बुरी बात ये है की अगर मैं चाहता तो इन्हे .......(गाली देकर ) मूंगफली क्यों खरीद रहे हो बे ...तो भी ये कुछ नहीं बोल सकते थे क्योंकि .....मैं नशे में हूँ ........
मैं डरा कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ पर अगले भाई साहब भी टुन्न थे सो मामला शांत ही रहा /
ये बातें जो मैंने लिखी हैं उससे मैं किसी को आहात नहीं करना चाहता हूँ पर अफ़सोस की बात ये है की ....क्या होगा अगर मेरे बाप मुझे पढने के लिए पैसा दें और मैं इस बुरी लत में फंश जाऊं ? क्या आजकल की युवा पीढी जो इस फैशन में रम रही है उसे इस बात का जरा सा भी अंदाजा है की दारू पी के प्रवचन देने से बेहतर है बिना दारू पीये कुछ करना .... कुछ अपने लिए ...समाज के लिए ...फ़िर कहें मैंने तो ये कर दिया तुम इससे आगे जाके दिखाओ
Monday, March 23, 2009
इस बात पर एक और बात याद आई की एक भाईसाहब ( पी चुके थे मैं प्रत्यक्ष दर्शी हूँ ) एक दूसरे व्यक्ति को कुछ ऐसे संबोधित करते हैं की , दारू एक अच्छी चीज है और एक बुरी चीज भी , है न भाईसाहब , अब चूंकि मेरी भी आदत या कहें ह्यूमन अप्रोच मैंने भी हवा कर दी , आख़िर दारू अच्छी और बुरी दोनों एक साथ सम्भव ही नहीं प्रूव करिए , तो लाजवाब कर देने वाली एक ओज्जस्वी वाणी निकली जो कुछ यूँ थी ........
http://myyaars.com/home.php
अब तो शराब के प्रचार में ऐसे उपकरण प्रयोग में लाये जाने लगे हैं की अकारण ही रिशिमुनियों के इस देश में ध्यान भंग होने का खतरा बना रहता है / पोस्टर में यदा कदा या सर्वत्र कहें '' i am in d mood of mischief '' लिखा मिल जाता है ,,
पढ़ चाहे न सकें पर पोस्टर में बहुत कुछ दिख जाता है .... /
अरिस्तोक्रेत , बैग ,कांतेसा ......जिन्गारू अंग्रेजी सब्दकोश kesabhi शराब के नाम में मिल जायेंगे ..ये सब शराब की ही तो महिमा है /
और तो और आप शराब की buraei भी कुछ दार्शनिक अंदाज़ में सुन सकेंगे ..जैसे मैं नहीं मानता शराब कोई बुरी वस्तु है पर हाँ आप बाप के पैसे से न पीयें ......... मेरे भाई साहब के दोस्त तो कुछ ऐसा ही कहते हैं सुनिए आप भी ...
देखो यार शराब पीना अच्छी बात नहीं है ये तो मैं ऐसे ही दोस्तों के संग शुरू कर दिया हूँ पर एक बात ध्यान में हमेशा रखना की जो मन में आए करना जरूर चाहिए / अगर आप अपने जीवन में कुछ करने जा रहे हो और आप को समझ में न आए की ये सही है या ग़लत तो अपने माता -पिता को सामने रखकर सोचो,, उसके बाद अगर तुम्हे लगता है की तुम ग़लत क्रमशः क्रमशः क्रमशः क्रमशः क्रमशः क्रमशः क्रमशः क्रमशः क्रमशः क्रमशः क्रमशः तो उस काम को कभी मत करो पर यदि तुम्हे लगता है की नहीं इससे उन्हें कोई नुक्सान नहीं होगा तो उस काम को तुंरत कर जाओ /
इन बातों से स्पस्ट होता है की एक पीने वाला
kramshah
Tuesday, March 3, 2009
MAIN NASHEIN MEIN HOON
हम पीते नहीं हम तो जिन्दगी को जीते हैं / अमा यार TRY तो करो एक बार से कुछ नहीं होता / अच्छा -अच्छा तुम थोड़ा कम ही पीना बाकि तो हम लोग हैं ही संभाल लेंगे / लाखों बहाने होते हैं पीने और पिलाने वालों के /
खुशी है तो सेलेब्रेशन में दुखी हैं तो गम में कोई न कोई बहाना तो मिल ही जाता है ऐसे सज्जनों को , ये तो choodiye बात शुरू करने का अंदाज ही निराला होता है /दूर की नहीं अपनी ही बात बताता हूँ साल भर हो गए दोस्त से मिले हुए लेकिन इस मनहूस जन्मदिवस पर फ़ोन आ गया / कहाँ हो भाई साहब एक्को फ़ोन -वोन तो कर लिया करिए जनाब ? हम भी दोस्त हैं आपके (ये बात अलग है अभी दो दिन पहले ही मैंने फ़ोन किया था , पर जाने कैसे भूल गया ) खैर आगे सुनिए - सुना है आपका जन्मदिन है कल / मन में तो आया गाली दूँ या फ़िर कहूं सुन लिए न बस ठीक है / पर जन्मदिन की खुशी में ऐसा कुछ मुंख से निकल नहीं पाता
अच्छा ये बताओ पार्टी -वार्टी दे रहे हो या नहीं ? मैंने पूछा अच्छा बता कैसी पार्टी चाहिए ? मैं समझ तो गया था की भाई साहब कोल्द्द्रिंक की मांग तो अवश्य करेंगे मेरा सोचना और उसका बोलना एक ही साथ हुआ /बोला यार कुछ खिला पिला दो /
बस हो गया बंटाधार जो माया बच रही थी उसकी माया तो देखिये एक ही पल में बिन माया हो जाने का स्वप्न दिखा गई /
और हाँ एक बात तो मैं भूल ही गया आज- कल तो पीने वालों के लिए ऐसे स्लोगन और गाने भी आने लगें हैं जो ये गर्व से गाते और सुनाते हैं जिसे -जब पीओगे कभी जैसे कहते हैं हम तो मिट जांयेंगे सारे दर्द और गम , जब छलकते हैं जाम लेके दिलबर का नाम तो रंगीन होती है हेर एक शाम ..........
अब देखियी पीने में भी एक कला होती है की आप खास ओकेजन पर किसे पियें / दिलबर जो एक शब्द गाने में है कुछ ज्यादा ही lojikal हो जाता दिलबर जो दिल का बार हो अर्थात मम्मी -पापा क्रमशः इजाजत मिले न मिले , ये शब्द तो मिल ही गया है
ये भी शराब की लत लगाने की बड़ी वजह बन सकती है कुछ लोगों को तो मैं जनता भी /
एक और सज्जन के विचार सुनिए ...thooda daru bich pyar मिला दे ......./अगर ये भाई साहब सही हैं तो मैं nishchit ही ग़लत हूँ
kramshah
