Saturday, January 30, 2010
गांधी जी ने कहा था......?
Tuesday, January 5, 2010
बर्फ का टुकड़ा...... |
अभी तक मैं ठोस था मेरी सीमाएं स्पष्ट थी स्थान निर्दिष्ट था
अब मैं पिघल रहा हूँ अनायास घुल रहा हूँ तरल बन रहा हूँ
नीचे...
नीचे...
नीचे...
कहीं तो ठहर जाऊंगा किसी गड्ढे में अपनी परिधि प् जाऊंगा
अंजुली भर मुझे उठाने की चेष्टा न करना
ऊँचाइयों से अब घबराता हूँ .........
V.P.Singh
Sunday, January 3, 2010
हम बदले तो सिर्फ हम ही बदल सकते हैं ...... और लोग नहीं |
हम और आप मिलकर एक काम करें की ये याद रखें की हम जहां रहते हैं जिस परिवेश में वो अपने घर की तरह ही होता है तो हमे उसे स्वछ रखना चाहिए
दूसरी बात ये भी जान लें की हम बदले तो ही आगे के लोग बदल सकते हैं .....................ये नहीं की अरे सिर्फ मेरे बदलने से क्या होगा ये सोच ही घातक होती है .......ये सोच कर हम अगले को मौका दे देते हैं की वो कह सके की क्या हुआ तुम जो बदलाव की बात कर रहे थे खोखली ही रह गयी naa
ab ये baatein sab लोग jaane तो behtar होगा की हम badlenge to सिर्फ हम ही badlenge ............ kisi और को बदलने के liye अपने starr से prayaas karna होगा
kramshah......
Friday, December 18, 2009
क्या मिलेगा बंटवारे से....?
मैं न तो राजनीति विश्लेषक हूँ न ही बंटवारे का पक्षधर मैं सिर्फ भारत का वह नागरिक हूँ जो सिर्फ ये जानना चाहता है की क्यों इस तरह के बिना सर -पैर वाले बयान दिए जाते हैं ? क्या बंटवारे से किसी खास को फायदा होने वाला है या फिर ये वो तुच्क्ष राजनीति है जिसके बारे में कहा जाता है की सिर्फ अपना फायदा देखना ही अक्लमंदी है अगर ऐसा है तो फिर जनसेवा का ढोंग क्यों किया जाता है ? विकास की बात तो सुनाने को रह गयीं है बस / हरित प्रदेश बनाने के लिए क्या आवश्यकताएं होंगी वो मुझे आपको क्या मालूम पर इतना तो पता है की अगर पैसा विकास पर ही लगाया जाये तो बांटने की नौबत ही न आये /
अभी जो चल रहा है उससे केवल और केवल विकास में बाधा उत्पन्न होगी / ये सुनने में ही बेढंगा लगता है की आपके प्रदेश का मुखिया जिस पर परिवार को संयुक्त रखने की जिम्मेदारी होती है, ही आपको बांटने पर अमादा है /
आप सीधा -सीधा समझे अगर एक परिवार में दस लोग कमाने वाले हैं और वो अपनी खुशियाँ और दुःख आपस में बाँटते हैं तो वो एक खुशहाल परिवार होगा पर अगर वो बंटवारा कर लेते है तो क्या वो उतने खुश रह सकेंगे ............. नहीं ये बात स्पष्ट है की वो उतने खुश नहीं रहेंगे /
अगर एक के पास भी आर्थिक दिक्कतें होंगी तो वह कर्ज में हो सकता है पर संयुक्त होते तो उसे बाहर से मदद न लेनी पड़ती ।
एक परिवार को बनाने में क्या होता है वो क्या जाने जिनके परिवार ही नहीं होता .......जिस भारत को अखंड कहा जाता है उसके खंड - खंड करके क्या मिलने वाला है ? जिस भारत के छोटे - छोटे प्रान्तों को मिलकर राज्य और राज्यों को मिलाकर अखंड भारत का निर्माण किया गया उसका ये हाल करने को अमादा है ये कथित बुद्धजीवी वर्ग / तरस आता है ऐसे विचारकों पर जिनमे विचारों की इतनी कमी है... और जिनके ऐसे विचार हों वो देश का प्रतिनिधित्व करने की बात करें तो हंसी आती है इस देश के भाग्य पर /
सुप्रीम कोर्ट का वो वक्तव्य मुझे आज भी याद है की इस देश का तो भगवान् भी भला नहीं कर सकता... अगर देश को नेतृत्व देने वालों का बांटो और राज करो का ही रवैया रहा तो ये बात सही ही होगी /
खैर ये बात ज्यादा न बढ़ाते हुए सिर्फ इतनी गुजारिश करूंगा की प्रदेश को बांटने न दीजिये प्रदेशवासियों के सब्र चुनौती देना भारी हो सकता है...........
Monday, November 9, 2009
राज का राज......... हिन्दी राज
राज ठाकरे जी माफ़ी चाहता हूँ वो इसलिए की मैं हिन्दी बोलना भी जानता हूँ और आपसे ये जानना चाहता हूँ की आप हिन्दुस्तानी पैदा हुए थे मराठी या फ़िर आप को अपनी मात्रभूमि पर संदेह है /
गद्दार लोगों को भारत से निकल कर बड़ी गलती हुई कम से कम वो होते तो भारत में एक ही भाषा होती /
खैर मैं इस बारे में बात करने को नही लिख रहा हूँ मैं ये जानना चाह रहा हूँ या फ़िर कोशिश कर रहा हूँ की भारत देश कितना सहनशील हो गया है माफ़ करिए उत्तर वासियों का देश , दक्षिण का देश ,पश्चिम का हह.....
या फ़िर हम सब भारत वासियों का देश क्या लिखा जाए मुझे सरकार के ढीले रवैये से संदेह होने लगा है /
आज जिस तरह से हिन्दी भाषा पर जूता चला है वो दिन दूर कहाँ रह जाएगा जब बाहर के लोग आकर जूता चला जायेंगे /
theek से याद नही आ रहा है की राज ठकरे जैसे देश द्रोहिओं को कोई सज़ा देने में इतनी ढिलाई क्यों हो रही है जिन लोगों को अज ४ सालके लिए baahar किया गया है उन्हें क्यों नही जीवन भर के लिए किसी भी संवैधानिक प्रक्रिया में भाग लेने se mana कर देना चाहिए /......................................
आगे...
Tuesday, April 7, 2009
अब आगे की कहानी...
दारू पीने वाले लोग अपना तो सत्यानाश करते ही हैं साथ में आस पास के माहोल को भी गन्दा करते हैं / घर से पैसा लेते हैं पढ़के कुछ बनके तब मौज उड़ने की तर्ज़ पे ;;,,, चाहे बाप क्यों न हो क़र्ज़ पे ,,,;;
पर करें भी क्या यहाँ आते ही मॉडल शॉप दिख जाती है इसमे बेचारून की गलती कहाँ दे दें // हर बाए संकल्प लेके उसको तोड़ने की आदती बन चली है युवा पीढी /
पीना जायज है या नहीं है मैं नहीं जानता पर दिखावे के लिए ये सब, पी के गाली देने के लिए ये सब , ये बताने के लिए देखो मैंने शराब पी रखी है ग़लत है।
मैंने एक एक पक्के शराबी से ये पूछा क्या वाकई में तना नशा हो जाता है ..तो उन्होंने कहा ये लोग { जो उनसे कमतर हैं } जितना पी के शोर करते हैं उतना मैं हमेशा पीये रहता हूँ पर मैं नहीं चीखता हूँ या गाली देता हूँ /
संभवता ये विचार अगर किसी पक्के शराबी को मिले तो मेरा सड़क पर चलना दूभर हो जाएगा क्योंकि सारे चरित्र आस पास के ही हैं और मैंने अपनी फोटो भी लगा रखी है
अगर मैं काका hathrasi बन jaoon तो नशा कुछ यूँ हतानूं
** नशा जरूरी है जिन्दगी के लिए ,पर सिर्फ़ शराब हा नहीं है बेखुदी के लिए /
किसी की मस्त नजरों में डूब जाओ , बड़ा हशीन समंदर है खुदखुशी के लिए // **
....... और बुरी बात ये है की अगर मैं चाहता तो इन्हे .......(गाली देकर ) मूंगफली क्यों खरीद रहे हो बे ...तो भी ये कुछ नहीं बोल सकते थे क्योंकि .....मैं नशे में हूँ ........
मैं डरा कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ पर अगले भाई साहब भी टुन्न थे सो मामला शांत ही रहा /
ये बातें जो मैंने लिखी हैं उससे मैं किसी को आहात नहीं करना चाहता हूँ पर अफ़सोस की बात ये है की ....क्या होगा अगर मेरे बाप मुझे पढने के लिए पैसा दें और मैं इस बुरी लत में फंश जाऊं ? क्या आजकल की युवा पीढी जो इस फैशन में रम रही है उसे इस बात का जरा सा भी अंदाजा है की दारू पी के प्रवचन देने से बेहतर है बिना दारू पीये कुछ करना .... कुछ अपने लिए ...समाज के लिए ...फ़िर कहें मैंने तो ये कर दिया तुम इससे आगे जाके दिखाओ
