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Monday, July 25, 2011

MY LINES 4

जब से गुजरे हो तुम हमारे दिल की वीरान-तंग गलियों से इक आह छोड़ गए हो
 आ सकता हूँ जब भी तुम पुकारो पर तुम ही जाने क्यूँ, न आने की राह छोड़ गए हो 

आते हैं हर पल-दिन वो याद भी क्यूँ न आयें, तुम ऐसी ही दिल में एक सांस छोड़ गए हो

बता दो कब तक बिना तेरे यूँ रहूँगा नहीं पता,क्यूँ मरते हुए जीने की इक आस छोड़ गए हो...उमेश सिंह




Tuesday, July 12, 2011

my lines

मनाता है तुम्हे फिर रूठने को मजबूर करता है,प्यार तुम्हे बेहद ये दिल बेक़सूर करता है
क्या हुआ जो तुम नहीं समझते हमे न समझोगे, तुम्हे समझ कर ये दिल गरूर करता है
जानते है गुनाह करता है ये सच में, फिर भी हमे गुनाहगार बनने को मजबूर करता है
बूँद जो पानी से उठता है,गिरता है,गिरता है,फिर उसी आगोश में गिरने को दिल जरूर करता है
कुछ इसी तरह जुड़े हैं तुमसे हम,इसलिए मनाता है तुम्हे,रूठने को मजबूर करता है...उमेश सिंह

Thursday, June 9, 2011

MY LINES

क्यूँ बैठे हो तुम दिल में बेजुबान बनके, अपनी यादों में हमको फ़ना करके
रहते हो हर पल पास खूबसूरत एहसास की तरह, क्यूँ रहते हो आँखों में आँखों को मेरी जगा करके
शिकायत करते हैं वो पल जब तुम्हे नहीं याद किया, क्या मिलता है तुम्हे मेरे वो पल तबाह करके
जागो अपनी आँखें खोलो और कुछ तो बोलो, मिलोगे मुझसे क्या कभी नजरें फिरसे चुरा करके





मत पूछ ऐ कातिल,क्यूँ फ़रियाद करते हैं हम,क्यूँ तुम पर फ़ना हुए
आँखों को अपना आईना दिखाना, ग़र जवाब माँगना हो...उमेश सिंह

Tuesday, May 31, 2011

दोष किस पर लगाऊं......???

                                                         क्या बताऊँ बेइज्जती सी लगती है बताने में पर सच में जब अपने पर पड़ती है तो पता चलता है ! कल बहुत पिटाई हुई सच में होती भी क्यूँ न हीरोगिरी दिखाने में लगा था न तो ओबामा को तो फंसना ही था !सोचा पुलिस कहाँ थी पर क्या करता मुझे या पुलिस को तो पता भी नहीं था की आज मेरी धुनाई इसी रस्ते पर लिखी है ! तब भी दोष तो पुलिस को ही दे सकता हूँ न आखिर अब तक तो इस विभाग को कोई ऐसा सॉफ्टवेर बना ही लेना चाहिए था जिससे वारदातें पहले पता चल जाया करें ! बिहार में कैदियों ने डोक को पीट दिया कहीं सी० ऍम० ओ० की हत्या हो गयी हमारी पुलिस क्या कर रही थी ? तकदीर और तफसीस दोनों का क्या भरोषा आगे क्या होने वाला है पर दोष तो किसी का होता ही है! जब बातें छिपायीं जाती हैं तो उसका खामियाजा किसी को तो भरना होता है या फिर होगा.....!!!! खैर पीछे लौटा तो पता चला जिस लड़की के लिए मैंने हीरोगिरी दिखाई थी वो भी पुलिस को ही दोष दे रही थी मजे की बात तो ये है की उस वक़्त भी मैं हम दोनों के बीच की सोच में समानता दूंढ़ रहा था, पागल मन , धन्यवाद पुलिस जी !! किसी तरह लड़खड़ा के उठा और मोहतरमा से पुछा कौन थे ये लोग जो अभी मेरा व्हाइटवाश करके गए हैं पहचानती हो -जवाब मत पूछियेगा पछता रहा हूँ सच में भाई ! 
                                   मैडम बोलीं हम पुलिस में नहीं जायेंगे वो फालतू के सवाल पूछेंगे ! मैंने सोचा कमाल की मैडम है पहले से ही सब जानती हैं ये भी पता रहा होगा आज मैं पिटने वाला था..... खैर मैंने कहा ऐसा नहीं होगा आप चलिए पर वो अडिग रहीं हो सकता है भविष्यदर्शी रहीं हो क्या पता पर इस बार पुलिस को दोष नहीं पर किसी को तो आखिर मैं .......!!!
                                किसी ने कहा तो सरकार को दोष दे दो विचारनीय बात थी पर सरकारें तो लगभग हर दोष से साफ़ बच निकलती हैं कोई फायेदा नहीं ! और निकलें भी क्यों न जितने का घोटाला उसका एक प्रतिशत भी लगाकर बच सकते हैं तो बचते हैं क्या बुरा है ?? अन्ना जी का सपोर्ट इस वाक्य के बाद मेरे ब्लॉग को तो नहीं मिलेगा हाँ ध्यान देने वाली बात ये है की अभी अन्ना जी का सपोर्ट सब करें तो ही भलाई है !!! ये सवाल मत करियेगा की सरकारें पैसे किसके ऊपर खर्च करती हैं या फिर घोटाले हुए ही नहीं या फिर कब हुए सूरज की रोशनी में कुछ भी दूंढ़ना नहीं पड़ता ....!!! तो अब दोष न्यायपालिका को दूं क्या ? नहीं हिम्मत ही नहीं है ना न्यायपालिका की कोई सरकार सुनती है (मन से ,मनसे) ना ही कोई मेरी सुनेगा ! उस लड़की को दोष दे सकता हूँ पर सच्चाई पता चल चुकी थी प्रेम प्रसंगों में थर्ड पार्टी मार खाती है ! दोस्तों को दोष दे नहीं सकता वो अभी तक इस मसले से अनभिग्य हैं !
                                अंत में सारे इशारे मेरी तरफ हो गए मैं खुद ही दोषी हो गया , जो दोष पुलिस या पूरे देश पर लगना था वो मुझपर ही रुक कर रह गया   ......!!!

Monday, May 2, 2011

MY LINES-UMESH SINGH

लोग क्यूँ कहते हैं आँखें बेजुबाँ होती हैं
ख़ामोश रहकर भी सब बयाँ कर देती हैं
बोलती हैं उनकी आँखें और हमें बेजुबाँ कर देती हैं
राहें भी दिखाती हैं राहें भी बताती हैं जीने के
सारे तरीके भी सिखाती हैं पैबस्त होती हैं दिल में
...दिल को दिल का हाल बयाँ कर देती हैं
कौन कहता है आँखें बेजुबान होती हैं
 
 
 
 
मुझे भी अपनी आँखों की जादूगरी सिखा दो
आँखें मिलाकर फिर आँखें चुराना सिखा दो
दो लफ़्ज कहने थे इन आँखों को तुम्हारी आँखों से
इन्हें भी ख़ामोश रहना सिखा दो,मेरी आँखों को चुप रह कर रोना सिखा दो
देखकर तेरी आँखों को ख़ुशी मिलती है इन आँखों को सलामत रखो
मेरी परवाह मत करो मेरी आँखें जला दो-मेरी आँखें जला दो
 
हमें उनकी आँखों की परवाह थी इसलिए हम उनसे आँखें न मिला सके
हरवक्त वो चुप बैठे थे हमारे पास और हम उन्हें जरा सा भी न हंसा सके
करें क्या हम अब उन लम्हों को याद करके जो उन्हें हमारे पास न ला सके
वो हमे याद करें न करें किसी पल हम उन्हें एक पल को भी न भुला सके
हमें याद है उनकी हर एक बात जो जिक्र न आने पर भी याद आती हैं
उम्मीद है वादा जो कर गए थे वो हमसे, मेरे लिए उस वादे को निभा सके
 
अब हँसाते भी नहीं तुम रुलाते भी नहीं उम्मीद बनकर रहते हो दिल के पास,तुम दूर जाते क्यूँ नहीं
किसी और को देख कर ये बेरहम दिल उसका हो जाये इसलिए कमबख्त इसको को हम मानते भी नहीं
मैं मेरे पास तक ही रुक कर रह गया हूँ तुम जाने क्यूँ,अपने पास तक आने का रास्ता बनाते ही नहीं
सोचा था तुम्हारा अच्छा दोस्त बनकर ही रह लूँगा,क्या करूँ सच है तुम साथ निभाते ही नहीं
 
मेरे दिल से सवाल मत करो जवाब नहीं है उसके पास,उनसे ही पूछना वो उस बेमुरव्वत को अपने साथ कर गए
उनकी खूबसूरत आँखें जो देखीं एक बार क्या, क़त्ल किया खुद का और अपनी आत्मा को तन्हा कर गए
अभी मिला था खुद से,ख़ुदा से पूछा भी क्यों किया ऐसा मेरे साथ,सच कहता हूँ वो भी इस सवाल से डर गए
अब वो वापस आयेंगे पर हम उनसे आँखें न मिला पाएंगे,शायद हम अपनी आत्मा की एक और मौत से डर गए.. उमेश सिंह
 
 
 
 

Friday, December 31, 2010

घोटाले में देश......

                                          हम तो बड़बोले हैं भैया ! शब्दों का घोटाला ही हमे आता है पर क्या करें इस घोटाले पर कोई कार्यवाही होती ही नहीं तो हम जरा सा अपसेट हों गए हैं इस वक़्त !
मूंदड़ा घोटाले से लेकर १९८२ के अंतुले प्रकरण तक तो हमारे पूर्वज ही घोटालों के किस्से सुनाकर हमे गौरवान्वित करते थे  पर अब आगे यह विकास प्रक्रिया चलती रहे इसके लिए हमारी पीढ़ी को मेहनत अथक मेहनत करनी होगी ! तब कहीं जाकर अपनी धरोहर को बचा सकेंगे हम ! किसी ने मुझसे कहा की अगर विदेशों में जमा धन हमे मिल जाये तो हमारा देश क़र्ज़ मुक्त हों सकता है पर विचारक के तौर पर ये कहना गलत ना होगा क़र्ज़ मुक्त होने के बाद हम चिंता मुक्त हों जायेंगे और हमारे काम करने की इच्छा मर जाएगी ! समझ नहीं पाए आप अरे भाई काला धन वापस होने का मतलब भ्रस्टाचार पर विजय पाना होगा और हम ये कैसे होने दे सकते हैं ! आखिर पूर्वजों को मुंह दिखाने लायक तो रहे ! २ जी स्पेक्ट्रम , आदर्श सोसाइटी घोटाला और कॉमनवेल्थ एक के बाद एक घोटालों ने से मन प्रसन्न हों गया आखिर हमने चोरी और फिर सीनाजोरी करने की हिम्मत तो दिखाई थी आपको नहीं लगता ये बड़ी बात है ! किसी ने कहा आपने जमीन घोटाला किया था हमने २ जी घोटाला किया अब आपकी सरकार आये तो ३ जी या फिर और कोई कर लेना  तरीका हम नहीं बताएँगे वो आप खुद जानो हम तो बस मुद्दा बनायेंगे ! एक बात और नोट कर लीजिये जनाब दागी को बर्खाश्त करेंगे सजा न्यायालय देगा मतलब सजा देगा कब मत पूछिए देगा भी तो हम न्यायालय को दागी करार देंगे ......! और नहीं तो बर्खाश्त भी नहीं करेंगे जनता समझदार होगी तो चारा घोटाला फिर ना होने देगी, कर्नाटक में घोटाले की सरकार चलती रहेगी !

तो हमने घोटाला किया, आप घोटाला करियेगा !
जनता तो बेवकूफ है, आप उसका दिवाला करियेगा!!
ले-लो घोटाला ले-लो, यहाँ यही दिखता है !
क्योंकि नेता घोटालेबाज हैं, और घोटाले का सच बिकता है !!

Sunday, August 29, 2010

हम ता ऐसनैं हन भैया----------------

काहे का नेता भैया कौनो नेता वाला काम किये हैं का \ इस विचार को सुनकर मैं कभी हैरान नहीं हुआ शायद आप भी नहीं होते होंगे और हों भी क्यूँ \ आज के नेता मल्टीटास्कर जो होते हैं मेरा मतलब सारे काम जो करते हैं A अब आप विश्वास तो करोगे नहीं तो यही जान लीजिये की आप किसी की जान नहीं ले सकते हों वैसे ये भी नहीं लेते हाँ आपकी जान रूह सहित निकलवा जरूर सकते हैं A लो आप भी कमाल करते हों अब मैंने भोपाल गैस कांड तो बोला नहीं था A मैं तो कह रहा था की हमारे नेता आप मानो या ना मानो ये होते बड़े सज्जन हैं अब मैंने तो कहा नहीं की ये विधानसभा या संसद में चप्पलों से बातें करते हैं और औरतों के सम्मिलित होने की बात ना जी ना इ इल्जाम ना लगाईये A आप लोग ऐसे गलत मतलब निकालोगे तो तो काम हो चुका A किसी भी खेल में या भारतीय रेल में हमारे नेताओं का नो इन्वोल्व्मेंट लो कर लो बात साफ सुथरा भी तो खेलना होता है A कोई दोष बता दो आप इनका या कोई दोष लगा ही दो और लगा भी दिया तो  प्रूव करके दिखा दो लेखनी की कसम जिन्दगी भर गुलाम रहूँगा आपका A अरे जाओ साहब इतना चैलेन्ज नेताओं से किये होते तो करियर बना देते हमारा लेखनी खुद ना रहती हाथ में हमारे A खुद खुश हो जाते हम भैया A नयी दरियादिली के बारे में आप ना जानते हों तो हमरा कौन सा दोष A यहाँ भुखमरी पड़ने पर हम भूखे रह लेंगे अनाज गोदाम में सड़े तो सडा देंगे पर मजाल है की हम किसी बाहरी व्यक्ति या पशु या फिर दानव को भूखा सोने दें फिर चाहे पलट कर वो हमारी थाली ही क्यूँ ना छीन ले A   

भूखें मरे किसान हमारे नेता महान जय हनुमान --------------------